Get Study Material & Notification of Latest Posts on Telegram


Get Study Material & Notification of Latest Posts on Telegram

ई वे बिल (E way Bill)

ई वे बिल (E way Bill)

जीएसटी के तहत ट्रांसपोर्टरों के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में माल ढुलाई के लिए जरूरी ई-वे बिल का इस्तेमाल देश में आज यानी 1 अप्रैल से लागू हो गया है. राज्यों के बीच 50,000 रुपए से अधिक मूल्य के वस्तुओं की ढुलाई के लिये इलेक्ट्रानिक वे या ई-वे बिल की जरूरत 1 अप्रैल 2018 से होगी। ट्रांसपोर्टर को जीएसटी (GST) कंप्यूटर प्रणाली से ई वे बिल लेना होगा।
कर्नाटक , राजस्थान,  उत्तराखंड और केरल में इ वे बिल 1 अप्रैल से लागु कर दिया गया है और इसे 1 जून  तक सभी राज्यों में लागु कर दिया जायेगा |

Also read….#5 Uttarakhand GK Quiz in Hindi

ई वे बिल की खास बातें

  • ई वे बिल सॉफ्टवेयर में ‘शिप टू’ प्रोविजन जोड़ा गया है
  • ट्रांसपोर्टर अब दूसरे रजिस्टर्ड या इनरोल किए ट्रांसपोर्टर को ईवे बिल नंबर असाइन कर सकता है, बाद में इसे बदला नहीं जा सकेगा
  • पार्ट ए से जनरेट किया गया यूनिक नंबर पार्ट बी में अपडेट करने के लिए 15 दिन तक वैध रहेगा। इसके बाद ही वैधता शुरू होगी
  • एयर, रेलवे या वेसल से सामान के ट्रांसपोर्ट के पहले या बाद में ई वे बिल दिया जा सकेगा
  • ऐसा जरुरी नहीं है कि जो सामान लेकर जा रहा है उसके पास ई वे बिल की कॉपी हो
  • एयर, रेलवे या वेसल से सामान से ट्रांसपोर्ट करने पर ई वे बिल का पार्ट बी दिखाना होगा
  • जब टैक्सेबल या टैक्स छूट वाले सामान का ट्रांसपोर्ट हो रहा हो तो 50 हजार रुपए तक की गणना नहीं होगी
  • ऐसी कंपनियां जो एविएशन, रेलवे या वेसल के तहत काम कर रही है तो कंसोलिडेटेड ईवे बिल जनरेट करने की जरुरत नहीं है
  • ईवे बिल का यूनिक नंबर 15 दिन तक वैध रहेगा
  • अगर वैलिडिटी पीरियड के दौरान सामान का ट्रांसपोर्ट नहीं हुआ तो पार्ट बी के फॉर्म में इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है

Leave a Comment

close