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पंचेश्वर बांध परियोजना उत्तराखंड

पंचेश्वर बांध परियोजना उत्तराखंड के चम्पावत जिले में बनाने वाली एक जल विधुत परियोजना है पंचेश्वर की दिल्ली से दूरी 455 किमी तथा अल्मोड़ा , पिथोरागढ़ व चम्पावत से दूरियां क्रमश 150 ,92, 44 किमी है |

pancheshwar dam

पंचेश्वर में महाकाली नदी के साथ चार अन्य नदियों गोरीगंगा, धौली, सरयू और रामगंगा का संगम होता है. पंचेश्वर बांध इसे बांधने की विशाल परियोजना है. कुल 5040 मेगावॉट की यह परियोजना दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट कही जा रही है. यह अगले साल सितंबर में शुरू होकर 2026 में पूरी होनी है. इसके लिये दोनों देशों की कुल 14000 हेक्टेयर ज़मीन पानी में समा जायेगी. उत्तराखंड के अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत ज़िलों के कई हिस्से इसके लिए बनने वाले बांध के डूब क्षेत्र में हैं. सरकार की प्राथमिक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में करीब 134 गांवों (पिथौरागढ़ – 87, चम्पावत – 26 और अल्मोड़ा – 21 गाँव ) के 54,000 लोगों के विस्थापित होने की बात कही गई है.

पंचेश्वर डैम टिहरी डैम से काफी ऊचा होगा पंचेश्वर बांध की ऊचाई 315 मीटर होगी | यहाँ भारत का सबसे ऊचा बांध होगा वर्त्तमान में टिहरी बांध भारत का सबसे ऊचा बांध है जिसकी उचाई 260 मीटर है |

पंचेश्वर डैम के साथ में दो छोटे बांध भी बनाये जायेंगे जो इसे नियंत्रित करने के काम आयेंगे इनमे से पहला होगा रुपालीगाड डैम जिसकी क्षमता 240 मेगावाट और दूसरा होगा पूर्णागिरी डैम जिसकी क्षमता 1000 मेगावाट होगी |

पंचेश्वर में बांध बनाने का सर्वप्रथम जिक्र 1996 में महाकाली संधि में हुआ था | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पिछली नेपाल यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच बांध के लिये संधि पर हस्ताक्षर किये |

पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना मुख्यतः विद्युत उत्पादन के अतिरिक्त, सिंचाई, पेयजल और बिहार व उत्तर प्रदेश में आने वाली बाढ़ पर नियंत्रण के उद्देश्य के लिए बनाई गई है। उत्तराखण्ड का एक बड़ा क्षेत्रफल इस परियोजना के तहत डूब जाना है और एक बड़ी आबादी इससे प्रभावित भी होनी है।

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